गुरु-Guru-

हमारे गुरु(Guru) कौन हैं -1 Great Thought

हिंदी लेख

हमारे गुरु (Guru) कौन हैं ?

आपके हिसाब से हमारे गुरु (Guru) कौन हैं ? गुरु वह हैं , जो जीवन के हर मोड़ पे हमें चलना सिखाये , हमें सही राह दिखाए , सही गलत में अंतर बताये ! गुरु कोई भी हो सकता है फिर वो हमारे माता -पिता ,भाई – बहन या हमारे दोस्त भी हो सकते हैं ! लेकिन इन सबसे ऊपर जो हमारे गुरु है वह हमारे अध्यापक हैं ,जो हमारे जीवन को आकार देते हैं , हमें नई दिशा दिखाते हैं , जीवन के हर परीक्षा में सफल होने का मार्ग बताते हैं l


यह सच है कि हमें जिंदगी हमारे माँ- बाप ने दी है ! हमारे जीवन में जो उनका योगदान है या उनकी कमी कोई पूरी नहीं कर सकता , लेकिन हम यह बात भी नहीं झुटला सकते की हमारे जीवन में शिक्षक का भी बहुत महत्व है ! हमारे शिक्षक भी माता- पिता सामान हैं l
विद्यार्थी जीवन में शिक्षक का बहुत महत्व होता है ! विद्यार्थी और शिक्षक के बीच एक अलग ही सम्बन्ध होता है l


यदि विद्यार्थी नहीं तो तो शिक्षक का क्या अर्थ और यदि शिक्षक(Guru) नहीं तो विद्यार्थी जीवन का क्या अर्थ ? माँ- बाप अपने बच्चो को हर तरह की सुविधा प्रदान करने लिए , उनकी इच्छाओ और ख्वाइशें पूरी करने के लिए दिन- रात पैसे कमाने में लगे रहते है l

गुरु-Guru


माता -पिता अपने बच्चो को सिर्फ सुख सुविधा प्रदान कर सकते है शिक्षा नहीं l माता पिता का कार्य बच्चो को विद्यालय तक छोड़ने का होता है उसके बाद वह अपने कार्य पे निकल जाते है ! दिन के ५/६ घंटे एक बच्चा अपने विद्यालय में अपने अध्यापक के साथ बिताता है l
ऐसे देखा जाए तो एक विद्यार्थी अपने जीवन का आधा से आधा समय अपने शिक्षक के साथ बिताता है ; क्योंकि माता- पिता काम में व्यस्थ रहते हैं l

विद्यार्थी को जो भी ज्ञान प्राप्त होता है अच्छा या बुरा वह सब शिक्षक (Guru) के द्वारा होता है l वह अध्यापक ही है, जब हम बाल रूप में होते है तो हमें अंग्रेजी या हिंदी का पहला शब्द बोलना सिखाते है , हमारी ऊँगली पकड के पेंसिल चलाना सिखाते  हैं l

जब हम रोते थे तो हमें अपने माता- पिता स्नेह किया ताकि हमें अपने माता – पिता की कोई कमी महसूस ना हो lजितनी चिंता हमारे माता – पिता को रहती है उतनी ही चिंता एक अध्यापक (Guru) को रहती है l जब परीक्षा होती है तो विध्यार्थी के साथ- साथ अध्यापक को भी चिंता होती है की हम अच्छे अंको से पास होंगे या नहीं l

क्योंकि वह अपने तरफ से पूरी कोशिश करते है की जितना ज्ञान उनके पास है वह विद्यार्थी को दे सकें l वे उतनी मेहनत भी करते हैं lविद्यार्थी को हर तरह का ज्ञान देते है ! सही गलत में अंतर बताते है l उनका भविष्य उज्वल करने के लिए जितना हो सके उतना वो हर क्षेत्र की जानकारी देते है l भविष्य में क्या करना चाहिए क्या नहीं ये सब बताते हैं l

वह विद्यार्थी किस क्षेत्र में , किस विषय में अच्छा है उस आधार पे उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते है lसिर्फ पढाई में ही नहीं यदि विद्यार्थी खेल – कूद में भी रूचि हो तो उसे भी प्रोत्साहित करते हैं l

एक विद्यार्थी को जितना उनके माता- पिता या खुद वह नहीं समझता उतना अध्यापक(Guru) समझते है ! उसके लिए क्या सही है क्या नहीं उसे किस्मे रूचि है किस्मे नहीं l इन सबसे ऊपर कुछ भी बनने से पहले एक विद्यार्थी को या हम सभी को एक अच्छा इंसान बनना जरुरी है l जब आप अच्छे बनोगे तभी आपका भविष्य अच्छा होगा आप अच्छा करोगे लोगो का l

यह कार्य भी एक शिक्षक (Guru) ही करता है l अध्यापक कभी-कभी हमें डाटते हैं ,मारते भी हैं लेकिन इसमें उनका कोई स्वार्थ या फायदा नहीं वह हमारे लिए ही करते है l

हमें पढ़ाने से उन्हें क्या मिलेगा बस कुछ रूपये वो तो कैसे भी पढ़ा के जा सकते है, उन्हें तो पैसे मिलेंगे ही lलेकिन हमरा भविष्य उज्वल हो हम जीवन में कुछ कर पाए इसलिए वो पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाते है l हम कुछ बन जायेंगे , या ज्यादा पैसे कमाएंगें तो उन्ही थोड़ी देंगे उनका कोई थोड़ी है फिर भी वह पूरी सिद्दत से अपना कार्य पूरा करते  हैं l

उनका कोई फायदा तो नहीं होगा लेकिन इस बात से वह खुश हो जायँगे की यह वही विद्यार्थी है जिसे मेने पढाया था l मेरी शिक्षा किसी के तो काम आयी lअपने ही विद्यार्थी को ऊचाई पे कौन खुश नहीं होगा? बदले में वो हमसे कुछ नहीं चाहते शिवाय सम्मान और आदर के ! लेकिन आजकल अपने अद्यापक के प्रति प्रेम तो छोड़ो आदर देखने भी नहीं मिलताl

आप ये मत भूलो की यह वही शिक्षक है जिस समय हमें हमारे माता पिता की जरुरत होती है वह समय हमें शिक्षक देते है l परीक्षा के समय हमें हमारे शिक्षक ही याद आते  हैं l

यदि विद्यार्थी उत्तीर्ण होता है तो शिक्षक जीत होती है l यदि वह विफल होता है तो शिक्षक(Guru) भी विफल होता है !जितनी तकलीफ विद्यार्थी को होती है उतनी ही शिक्षक को l
आज हमारे देश में हर चीज की सुविधा कार , मोटर – गाड़ी , कंप्यूटर यह सब एक इंजीनियर बनता है , हमारा इलाज करने के लिए डॉक्टर है , इंसाफ दिलाने के लिए वकील है , हमारी रक्षा करने के लिए पुलिस , फौजी है , बडे- बडे वैज्ञानिक है जिनका अविष्कार एक चमत्कार से कम नहीं l
यह सब किसकी देन है या किसी इंसान को डॉक्टर , कौन बनाता है ? कोई जन्म से डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बनता यह सब हमारे अध्यापक की देन है l उनकी बदौलत आज हमारे समाज में डॉक्टर , इंजीनियर ,पुलिस  हैं l

यदि शिक्षक ना होते तो ना कोई डॉक्टर बनता न कोई इंजीनिअर ना फौजी ना वैज्ञानिक !यही कहना चाहूँगी अपने शिक्षक का आदर – सम्मान करे l उन्हें देख के मुँह ना मूड़ें ,क्यूँ की जो भी कमियाबी आपको मिली है वह हमारे गुरु (Guru) यानि हमारे शिक्षक की ही देन है l

Juhi Kesharwani
Author: Juhi Kesharwani